पुरुष के खर्राटे स्त्री के संस्कारों का फल होते हैं, क्योंकि
पुरुष के खर्राटे स्त्री के संस्कारों का फल होते हैं, क्योंकि स्त्री दिन भर चुप नहीं रहती और पुरुष रात भर। यही तो दांपत्य जीवन की खूबसूरती है— स्त्री दिन भर बोलती है, और पुरुष रात भर जवाब देता है। 😄 कहते हैं कि हर कर्म का फल मिलता है, बस समय अलग-अलग होता है। कुछ कर्म दिन में किए जाते हैं और उनका फल रात में खर्राटों के रूप में मिलता है। घर की दिनचर्या पर नज़र डालिए— स्त्री दिन भर बोलती है। कभी समझाती है, कभी याद दिलाती है, कभी शिकायत करती है, तो कभी बस यूँ ही दिल की बात कहती रहती है। वह चुप इसलिए नहीं रहती क्योंकि उसके पास कहने को कुछ नहीं होता, बल्कि इसलिए बोलती है क्योंकि घर चलाना सिर्फ़ चुप रहकर संभव नहीं। दूसरी ओर पुरुष होता है। दिन भर काम, थकान, ज़िम्मेदारियाँ और ऊपर से स्त्री की बातें— सब कुछ सुनते-सुनते वह ज़्यादातर समय चुप ही रहता है। वह बहस नहीं करता, ज़्यादा जवाब नहीं देता, बस मन ही मन सब जमा करता रहता है। और फिर रात आती है… जैसे ही सिर तकिए पर पड़ता है, दिन भर की चुप्पी खर्राटों के रूप में पूरे घर में गूँजने लगती है। स्त्री करवटें बदलती है, नींद टूटती है, और मन मे...