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क्यों तोड़ें चाँद-तारे? जो जहाँ है, वहीं सुखी रहे

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  क्यों तोड़ें चाँद-तारे? जो जहाँ है, वहीं सुखी रहे जब हम छोटे थे, तो लगता था कि जिंदगी में कुछ बड़ा करना है। चाँद-तारे तोड़कर लाने हैं, सबसे आगे निकलना है, बहुत नाम कमाना है और हर सपना पूरा करना है। तब लगता था कि जितना ज्यादा हासिल करेंगे, उतने ज्यादा खुश रहेंगे। लेकिन उम्र के साथ सोच बदलती है। अब लगता है— क्यों तोड़ें चाँद को? क्यों तोड़ें तारों को? चाँद अपनी जगह खूबसूरत है, तारे अपनी जगह चमक रहे हैं और हम अपनी जगह ठीक हैं। आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन कितना? Progress और success की चाह गलत नहीं है। हमें मेहनत करनी चाहिए, सीखना चाहिए और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाना चाहिए। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब “आगे बढ़ना” जिंदगी का एकमात्र लक्ष्य बन जाता है। एक मंजिल मिलती है तो दूसरी चाहिए। दूसरी मिलती है तो तीसरी। और इसी दौड़ में हम भूल जाते हैं कि जो हासिल किया है, उसे जीना भी तो है। कभी-कभी खुद से पूछना चाहिए— “मुझे सच में और कितना चाहिए?” हर किसी की सफलता अलग होती है दूसरों को देखकर अपनी जिंदगी को छोटा समझना जरूरी नहीं। किसी के लिए बड़ी नौकरी सफलता है, किसी के लिए अपना व्यवसाय, किसी के ल...